ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारी
बनने के 160 फायदे हैं 😅
लोग पूछते हैं- ब्रह्माकुमारी में जाकर तुम्हे क्या मिला? सबकुछ तो तुम्हारा छूट गया।
मैंने कहा- जो छूटा वो तो मेरा कभी था ही नही बल्कि जो मिला वो अनंत हैं। मैं चाहूँगी / चाहूंगा जब भी मेरा जन्म हो, हर जन्म में मैं ब्रह्माकुमारी / ब्रह्माकुमार बनूँ।
😅 क्या छोड़ा, क्या पाया🤫 ?
1. भौतिकता को छोड़ा, आध्यात्मिकता को पाया
2. भोगी जीवन छोड़ा, योगी जीवन पाया
3. कलियुग छोड़ा, संगमयुग पाया
4. इन्द्रिय सुखों को छोड़ा, अतीन्द्रिय सुख पाया
5. रिफ्यूज के डिब्बे को छोड़ा, भगवान के दिलतख्त पर स्थान पाया
6. डूबनेवाले जहाज को छोड़ा, तारनेवाले जहाज को पाया
7. चकाचौंध को छोड़ा, चकोर ने चाँद को पाया
8. गागर को छोड़ा, सागर को पाया
9. भेड चाल को छोड़ा, एम ऑब्जेक्ट पाया
10. अज्ञान निद्रा को छोड़ा, जागती ज्योत पाया
11. काँटो के जंगल को छोड़ा, मधुबन को पाया
12. शोक वाटिका को छोड़ा, अशोक वाटिका पाया
13. बेहद की रात को छोड़ा, बेहद का अमृतवेला पाया
14. माया के रेगिस्तान को छोड़ा, ईश्वरीय गुलस्तान पाया
15. जिस्मानी श्रृंगार को छोड़ा, रूहानी श्रृंगार पाया
16. अधीनता को छोड़ा, अधिकार पाया
17. बदहाल जीवन को छोड़ा, हाल खुशहाल पाया
18. पुरानी चाल को छोड़ा, चाल फ़रिश्ते की पाया
19. कखपन को छोड़ा, नया जीवन पाया
20. अभिमान को छोड़ा, अभी अभी मान पाया
21. दूरियों को छोड़ा, ईश्वर को कम्बाइंड पाया
22. भक्ति को छोड़ा, ज्ञान को पाया
23. चालाकी को छोड़ा, भोलेनाथ को पाया
24. मैं पैन को छोड़ा, कारनकरावनहार को पाया
25. किनारे को छोड़ा, सहारे को पाया
26. विष को छोड़ा, अमृत पाया
27. कब्रस्तान को छोड़ा, परिस्तान को पाया
28. कोंक्रीट के जंगल को छोड़ा, प्रकृति के सौंदर्य को पाया
29. वाकयुद्ध को छोड़ा, मौन के अगाध शस्त्र को पाया
30. हद के परिवार को छोड़ा, विश्व को परिवार के रूप में पाया
31. टाल टालीयों को छोड़ा, बीज को पाया
32. परदर्शन को छोड़ा, स्वदर्शन चक्र पाया
33. अक्षौणी सेना को छोड़ा, सर्व शक्तिमान खुदा दोस्त पाया
34. दीनता हीनता को छोड़ा, दिव्यता को पाया
35. छाछ को छोड़ा, मक्खन पाया
36. बेहोशी को छोड़ा, नारायणी नशे को पाया
37. रॉब छोड़ा, रूहानियत पाया
38. फिकर को छोड़ा, फखुर पाया
39. गृहस्थी की बोज वाली जीवन को छोड़ा, निश्चिन्त ट्रस्टी जीवन पाया
40. डबल हिंसा को छोड़ा, डबल ताज पाया
41. देहभान से रिश्ता छोड़ा, फरिश्ता स्वरुप पाया
42. स्थूलता को छोड़ा, सूक्ष्मता को पाया
43. क्वेश्चन मार्क को छोड़ा, फुल स्टॉप पाया
44. दिलशिकस्तपने को छोड़ा, दिलखुश मिठाई को पाया
45. कडुआपन (पतित) छोड़ा, मीठे बच्चे का टाइटल पाया
46. हद की कामनाओं को छोड़ा, सामना करने की शक्ति को पाया
47. बुद्धि को भ्रमित करने वाले भूसे को छोड़ा, प्रखर बुद्धि का पारसमणि मुरली के रूप में पाया
48. चिंता की चिता को छोडा, प्रभु चिंतन में परमानन्द पाया
49. मौज शौक को छोड़ा, मौलाई मस्ती को पाया
50. कोलाहल को छोड़ा, अनहद नाद पाया
51. हरी, वरी, करी को छोड़ा, हेल्थ, वेल्थ, हैप्पीनेस को पाया
52. आधि व्याधि उपाधि को छोड़ा, सुख शांति पवित्रता को पाया
53. हद की इच्छाओं को छोड़ा, अपने को अच्छा पाया
54. लोक लाज को छोड़ा, अपने को लोक पसंद पाया
55. परतंत्रता के पिंजरे को छोड़ा, स्वतन्त्रता के आसमान को पाया
56. कौड़ीयों को छोड़ा, हीरों को पाया
57. सपनों के संसार को छोड़ा, अपनों का संसार पाया
58. अर्श छोड़ा, फर्श पाया
59. माया की छाया को छोड़ा, प्रभु की छत्रछाया को पाया
60. चार दिन की चांदनी को छोड़ा, कल्प कल्प का अटल भाग्य पाया
61. दीपक को छोड़ा, सूरज को पाया
62. अंधेपन को छोड़ा, त्रिनेत्रों को पाया
63. गम के पुर को छोड़ा, बेगमपुर को पाया
64. आसुरी भोजन को छोड़ा, ब्रह्मा भोजन पाया
65. बनावटी माल को छोड़ा, तरावटी माल पाया
66. नुक्ताचीनी को छोड़ा, चोबचीनी को पाया
67. विनाशी आधारों को छोड़ा, ऑलमाइटी का आधार पाया
68. निराशा को छोड़ा, उमंग उत्साह के पंख पाया
69. क्यू को छोड़ा, स्वयं को नंबर वन पाया
70. अवगुणों के फ्लॉ को छोड़ा, अपने को बेदाग़ पाया
71. मेहनत को छोड़ा, मोहब्बत का झूला पाया
72. थकावट को छोड़ा, दिल आराम को पाया
73. चतुराई को छोड़ा, चतुर सुजान को पाया
74. चंचलता को छोड़ा, अचल अडोल स्थिति को पाया
75. मुठ्ठी चावल को छोड़ा, महल पाया
76. आसक्ति को छोड़ा, अनासक्त वृत्ति को पाया
77. साधारणता को छोड़ा, महानता को पाया
78. कीचड़ को छोड़ा, अपने को कमल पाया
79. स्वार्थ को छोड़ा, स्व अर्थ को पाया
80. अंतर को छोड़ा, महामंत्र को पाया
81. कनरस को छोड़ा, मनरस पाया
82. गधाई को छोड़ा, राजाई को पाया
83. ठिक्कर ठोबर को छोड़ा, मट्टा सट्टा पाया
84. बॉलीवुड को छोड़ा, गॉडलीवुड पाया
85. क्रूड ऑइल बुद्धि को छोड़ा, डबल रिफाईन्ड पेट्रोल बुद्धि पाया
86. बहिर्मुखता का मैदान छोड़ा,अन्तर्मुखता की गुफा को पाया
87. कुसंग छोड़ा, सत्संग पाया
88. नास्तिकपने को छोड़ा, आस्तिकपने को पाया
89. काम चिता को छोड़ा, ज्ञान चिता को पाया
90. टोकरी को छोड़ा, ताज पाया
91. माया के नकाबों को छोड़ा, अपने असली अनादि स्वरुप को पाया
92. कारण को छोड़ा, निवारण पाया
93. शाम दाम दंड भेद को छोड़ा, प्रीत मीत गीत रीत को पाया
94. शत्रुता को छोड़ा, अजातशत्रु को पाया
95. दुर्भावनाओं को छोड़ा, सदभावनाओं को पाया
96. क्रिमिनल आईज को छोड़ा, सिविल आईज को पाया
97. कम्प्लेन करना छोड़ा, अपने को कम्पलीट पाया
98. अज्ञान छोड़ा, अपने को अभय पाया
99. रोल्ड गोल्ड को छोड़ा, रियल गोल्ड पाया
100. खयानत को छोड़ा, अपने को ईश्वरीय अमानत पाया
101. विकारों की अग्नि को छोड़ा, पवित्रता की शीतलता को पाया
102. विपरीत बुद्धि को छोड़ा, प्रीत बुद्धि को पाया
103. रावण की सेना को छोड़ा, राम की रूहानी सेना में स्थान पाया
104. असार छोड़ा, सार पाया
105. अनित्य छोड़ा, नित्य पाया
106. व्यर्थ छोड़ा, समर्थ पाया
107. अनेक रसों को छोड़ा, एक में सर्व रसों को पाया
108. काँटों के नगर को छोड़ा, अपने को फूलों की डगर पर पाया
109. टुकड़े टुकड़े वाले दिल को छोड़ा, एक में ही सर्व सम्बन्धों को पाया
110. अंचली को छोड़ा, असीम को पाया
111. सकाम को छोड़ा, निष्काम को पाया
112. तामसिक भोजन छोड़ा, सात्विक भोजन पाया
113. अतीत की यादों को छोड़ा, त्रिकाल के ज्ञान को पाया
114. घटाटोप अंधकार को छोड़ा, असीम प्रकाश को पाया
115. विस्तार को छोड़ा, बिन्दी को पाया
116. निम्न को छोड़ा, विशाल को पाया
117. चित्र को छोड़ा, विचित्र को पाया
118. नाराजगी को छोड़ा, राज को पाया
119. एक को छोड़ा, पदम् पाया
120. बीमारी को छोड़ा, हेल्थ वेल्थ दोनों पाया
121. नींद में सोने को छोड़ा, स्वयं को सोना पाया
122. पत्थरबुद्धि को छोड़ा, पारसबुद्धि को पाया
123. अल्प को छोड़ा, पूर्ण को पाया
124. मनमत को छोड़ा, श्रीमत को पाया
125. अजनबी को छोड़ा, कल्प पहले वाली पहचान पाया
126. चंचलघर को छोड़ा, अचलघर पाया
127. बेपनाही को छोड़ा, प्रभु पनाह पाया
128. फीके राग को छोड़ा, सरस वैराग पाया
129. अमीरी को छोड़ा, गरीब नवाज को पाया
130. डार्क हाउस को छोड़ा, अपने को लाइट हाउस पाया
131. अति-अंत को छोड़ा, बैलेंस से ब्लेसिंग पाया
132. सोने के हीरन को छोड़ा, सच्ची कस्तूरी पाया
133. सोने की जंजीरों को छोड़ा, अपने को बंधनमुक्त को बांधते हुए पाया
134. कुम्भकर्ण की नींद को छोड़ा, बेहद के जागरण को पाया
135. दुःख लेना देना छोड़ा, दुआओं का स्टॉक पाया
136. निर्बलता को छोड़ा, अपने को शिव शक्ति पाया
137. लीकेज को छोड़ा, अपने को भरपूर पाया
138. सिनेमा को छोड़ा, अपने को हीरो एक्टर पाया
139. दिखावे को छोड़ा, अपने को साक्षी दृष्टा पाया
140. डीस्ट्रक्टिव युवापन को छोड़ा, अपने को विश्व नवनिर्माण के निम्मित पाया
141. कर्म बंधन को छोड़ा, कर्म सम्बन्ध पाया
142. अहंकार को छोड़ा, अलंकार को पाया
143. आधे कल्प की मूर्छा को छोड़ा, अपने को सूरजीत पाया
144. विस्मृति को छोड़ा, अपने को अंगद पाया
145. पुराने अस्थि पंजर को छोड़ा, अपने को दधीचि ऋषि पाया
146. दल दल को छोड़ा, अपने को गद गद पाया
147. व्यर्थ संकल्पों को छोड़ा, रोम रोम पुलकित पाया
148. शव को छोड़ा, शिव को पाया
149. भूल भूलैया को छोड़ा, घर जाने का रास्ता पाया
150. रावण के वंश अंश को छोड़ा, रग-रग में राम पाया
151. किश्तों को छोड़ा, कल्प कल्पान्तर की लॉटरी को पाया
152. पांच खोटे सिक्कों को छोड़ा, अपने को पदमापदम् पति पाया
153. सांप को छोड़ा, मस्तक मणि पाया
154. कच्चे व्यापार को छोड़ा, अपने को मास्टर सौदागर पाया
155. माया की खातिरदारी को छोड़ा, ईश्वरीय विशेष खोरश पाया
156. रावण से रिश्ता तोड़ा, खुदा का ख़त पाया
157. कनिष्ट को छोड़ा, उत्तम पाया
158. दुर्गति को छोड़ा, सदगति को पाया
159. अधो गति को छोड़ा, उर्ध्व गति पाया
160. संसार समाचार को छोड़ा, विश्व की हिस्ट्री जॉग्राफी का समाचार पाया
🇲🇰🔥 ॐ शांति 🙏 🌹
Om Shanti 💎 🕉️